संत खेतेश्वर महाराज जी की जीवनी | Sant KhetaRam ji Maharaj Biography In Hindi

संत खेताराम जी महाराज

आज के इस पोस्ट में हम आपको बताने वाले हैं संत खेतेश्वर महाराज के जीवन परिचय के बारे में, हम इस पोस्ट में आपको Sant Kheteshwar Maharaj Biography, Jivani, माता-पिता, भक्ति मार्ग, ब्रह्माधाम की शुरूआत के बारे में बताएंगे।

Sant KhetaRam ji Maharaj Biography And Wiki

पूरा नामसंत खेताराम जी महाराज
धाम आसोतरा बाड़मेर
जन्म22 अप्रैल 1912
निर्वाण7 मई 1984 समय 12 .36 बजे
जन्म स्थानखेड़ा-सांचोर जिला जालौर
गुरु दीक्षासंत शिरोमणि श्री गणेशा नंद जी महाराज
अंश अवतार ब्रह्माजी

    

संत खेताराम जी महाराज परिचय

जब धरती पर अज्ञान अंधकार  बढ़ने तथा धर्म घटने लगता है तब भगवान किसी न किसी रूप में इस धरती पर  जन्म लेकर लोगों को सत्य का मार्ग दिखाते हैं इस धरती पर कई देवी-देवताओं, साधु-संतों ने जन्म लेकर अपने तप त्याग की बदौलत विस तत्वों का नाश कर अमृत तत्वों का विद्यमान किया।

आज आपको इस पोस्ट में हम बताएंगे कलयुग के ब्रह्मअवतारी श्री खेतेश्वर महाराज के जीवन परिचय के बारे में।
संत खेताराम जी महाराज राजस्थान के  बाड़मेर जिले के आसोतरा गांव में विश्व का दूसरा ब्रह्मा मंदिर बनाया, इन्होंने राजपुरोहित समाज को एक धागे में पिरोने का काम किया और समाज को आगे बढ़ाने के लिए कई उपदेश दिए, जिसकी बदौलत आज राजपुरोहित समाज नई ऊंचाइयों पर है।

संत खेताराम जी महाराज जन्म, परिवार

ब्रह्म अवतारी संत खेतेश्वर महाराज का जन्म विक्रम संवत 1969 मास वैशाख शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि वार सोमवार को जालौर जिले के सांचौर तहसील में खेड़ा गांव में हुआ। अंग्रेजी कैलेंडर में बात करें तो संत खेताराम जी महाराज का जन्म 22 अप्रैल 1912 को हुआ। Sant KhetaRam Ji Maharaj के पिता का नाम श्री शेर सिंह जी है तथा माता का नाम सिणगारी देवी है। यह मूल रूप से बाड़मेर जिले के पचपदरा तहसील के सराणा गांव के रहने वाले थे।  खेताराम जी का जन्म हुआ तो इनके माता-पिता काफी प्रसन्न हुए और इनके मुख के तेज को देखकर काफी खुश हुए।

जन्म के 9 दिन बाद जोशी को बुलाकर श्री खेताराम जी का नामकरण किया गया तो जोशी ने इनका नाम खेत सिंह रखा, लेकिन बाद में खेताराम जी महाराज ने अपना नाम खेतसिंह से खेताराम कर दिया। उस समय पश्चिमी राजस्थान में अकाल बहुत ज्यादा पड़ता था इस कारण खेताराम जी के पिताजी शेर सिंह अपने पैतृक गांव को छोड़कर खेड़ा गांव में कृषि का कार्य करते थे।

खेताराम जी के दो बड़े भाई भोमासिंह और हुक्म सिंह जी है इसके बाद Sant KhetaRam Ji Maharaj का जन्म हुआ। जिस वर्ष खेताराम जी महाराज का जन्म हुआ, उस वर्ष फसल काफी अच्छी हुई।
इसके बाद खेतारामजी के पिताजी वापस अपने पैतृक गांव सराणा आ गई, इसके कुछ समय बाद Sant KhetaRam Ji Maharaj के सिर से माता पिता का साया चला गया था लेकिन घर में सबसे छोटे होने के कारण इन्हें अपने बड़े भाई भोमासिंह और हुकम सिंह जी काफी प्यार और स्नेह करते थे।

Father ( पिता )श्री शेरसिंह
Mother ( माता )श्रीमति सणगारी देवी

संत खेताराम जी महाराज भक्ति मार्ग की ओर

खेताराम जी महाराज बचपन से ही भक्ति मैं काफी ज्यादा रुचि लेते थे जिस कारण इनके बड़े भाई भोम सिंह ने इन्हें सांसारिक जीवन में लगाने के लिए 12 वर्ष की उम्र में गोलीय गाव के वहां राजपुरोहित की लड़की से इनकी सगाई कर दी। जब Sant KhetaRam Ji Maharaj को पता चला कि उनकी सगाई कर दी है और जल्दी शादी कर लेंगे, तो उन्होंने एक चुनरी ली और जहां सगाई की गई थी उस घर पर जाकर उस लड़की को वह चुनरी उड़ा कर, बहन कह कर संबोधित कर दिया, कई लोगों ने Sant KhetaRam Ji Maharaj को काफी समझाने का प्रयास किया परंतु बर्मा अवतार खेताराम जी महाराज बिल्कुल भी विचलित नहीं हुए और भक्ति के मार्ग पर चलने का फैसला जारी रखा।

इसके बाद खेत सिंह ने अपना नाम बदलकर खेताराम कर लिया और अपने पिताजी की मृत्यु के बाद यह अपने भाई भोम सिंह के साथ अपने मूल गांव सराणा आ गए। 
अब खेताराम जी महाराज अपना पूरा मन भक्ति में लगा दिया, जहां कहीं पर भी आसपास रात्रि में जागरण भजन संध्या होती तो यहां पर चले जाते और सारी रात बिना पलक झपकाए Sant KhetaRam Ji Maharaj भजन का आनंद लेते और राम नाम का गुणगान करते।

संत खेताराम जी महाराज भक्ति मार्ग पर

एक बार खेताराम जी महाराज साईं की बेरी पर गए हुए थे तो वहां पर उन्हें गणेशाराम जी महाराज मिले तब संत गणेशाराम जी महाराज ने Sant KhetaRam Ji Maharaj के चहरे का तेज देखकर पता लगाया कि यह तो एक अवतार है।

उसके बाद गणेशाराम जी महाराज ने खेताराम जी से पूछा कि बेटा किसी को गुरु बनाया है या नहीं?

तब Sant KhetaRam Ji Maharaj ने कहा कि मुझे आपसे श्रेष्ठ गुरु और कहीं नहीं मिल सकता इसीलिए मैं आपका शिष्य बनना चाहता हूं।  तब गणेशा राम जी महाराज ने खेताराम जी महाराज के सिर पर हाथ रखकर गुरु मंत्र का जाप किया और दीक्षा देकर अपना शिष्य बना लिया।

संत गणेशाराम जी महाराज के सानिध्य में खेताराम जी महाराज ने अपनी दिव्य शक्तियों को जागृत किया और आध्यात्मिक ज्ञान को हासिल किया।

इसके बाद खेताराम जी महाराज ने पिपलिया तालाब पर 3 वर्ष तक शिव जी की कठोर तपस्या की, उसके बाद Sant KhetaRam Ji Maharaj अपने मूल गांव खेड़ा गए और वहां पर रूगनाथ राम जी महाराज के साथ तपस्या करना प्रारंभ किया, यहीं पर खेताराम जी महाराज ने अपनी तपस्या के बल पर सिद्धियां प्राप्त की।

उसके बाद खेताराम जी महाराज में सिवाना में बाबा रामदेव जी का तथा मुठली में महादेव जी का मंदिर बना कर तपस्या की । खेताराम जी महाराज ने लोगों को सत्संग, जीव कल्याण, अहिंसा, ज्ञान आदि के उपदेश दिए।

इसके बाद खेताराम जी महाराज ने समदड़ी के पास एक पीपल के पेड़ के नीचे आसन लगाकर 12 वर्ष तक बिना अन्न जल के कठोर तपस्या की। 

इसके बाद Sant KhetaRam Ji Maharaj ने समदड़ी में रेलवे स्टेशन के पास एक महादेव जी का मंदिर अपने हाथों से बनाकर मूर्ति स्थापित की, यही पास में पीपा जी महाराज का मंदिर बनाकर प्राण प्रतिष्ठा करवाई।

एक बार खेताराम जी महाराज किसी काम से रेलगाड़ी द्वारा बालोतरा से जोधपुर जा रहे थे तब समदड़ी के पास टीटी ने Sant KhetaRam Ji Maharaj से टिकट लेने के लिए बोला तो खेताराम जी महाराज ने अपनी झोली में हाथ डालकर टीटी को पैसे दिए और टिकट बनाने के लिए बोल दिया, लेकिन टीटी खेताराम जी वापसी को देखकर उन्हें रेल से नीचे उतरने के लिए बोल दिया तो खेताराम जी महाराज ने अपना चुटिया और जोली लेकर रेल गाड़ी से नीचे उतर गए और पास में एक पेड़ के नीचे  अपना आसन लगाकर भगवान का जप करने लग गए।

इसके बाद रेलगाड़ी का इंजन वहीं पर जाम हो गया, जोधपुर से नया इंजन को मंगवाया गया लेकिन वह इंजन भी काम ना आया कई बड़े-बड़े इंजीनियरों को बुलाया गया, लेकिन फिर भी रेलगाड़ी हिली तक नहीं।

इसके बाद किसी व्यक्ति ने टीटी के पास जाकर उनसे कहा कि आपने जिस साधु महात्मा को नीचे उतारा है वह एक अवतार है तब उस टीटी ने खेताराम जी महाराज के चरणों में जाकर माफी मांगी, तब खेताराम जी महाराज ने अपनी झोली में हाथ डालकर बहुत सारे अलग-अलग स्टेशन की टिकट निकाल कर बताएं और कहा कि यह लो आपको कौन से स्टेशन का टिकट चाहिए। 

इसके बाद टीटी ने खेताराम जी महाराज से माफी मांगी और रेलगाड़ी में वापस बैठा दिया तो खेताराम जी महाराज ने अपने चुटिया से रेल गाड़ी को टच किया और कहा कि “चलो रेलगाड़ी संतो वाले देश” और उसके बाद रेल गाड़ी आगे चलने लग गई।

इसके बाद संत खेताराम जी महाराज ने अपने  राजपुरोहित समाज की स्थिति को देखकर काफी ज्यादा दुखी होते थे खेताराम जी महाराज सोचते थे कि अगर राजपूत समाज शिक्षित और सही मार्ग पर नहीं चला तो यह लोगों को आने वाले समय में नई राह नहीं दिखा पाएंगे, इसलिए Sant KhetaRam Ji Maharaj ने अपने जीवन को राजपुरोहित समाज को आगे बढ़ाने के लिए लगा दिया।

इसके बाद Sant KhetaRam Ji Maharaj ने बालोतरा से 8 किलोमीटर दूर सिवाना के रास्ते पर आसोतरा गांव में शिव जी का धुणा बनाकर तपस्या करना प्रारंभ कर दिया और अपनी राजपूत समाज को जोड़ने का काम किया।  खेताराम जी महाराज की उपदेशों का पालन कर राजपूत समाज में कुरीतियों, बुराइयों को छोड़कर सही मार्ग पर आकर खेताराम जी महाराज के उपदेशों का पालन करने लगे। इसके बाद से ही राजपुरोहित समाज में भेड़ बकरी का पालना बंद कर दिया।

राजपुरोहित समाज के युवा लोगों ने अपने घरों को छोड़ कर  शिक्षा हासिल की और कई लोग बड़े-बड़े बिजनेस करने लगे, हलवाई का काम भी राजपुरोहित समाज के लोगों ने करना प्रारंभ किया। आज देश के कई बड़े-बड़े पदों पर राजपुरोहित समाज के युवा कार्यरत है और कई लोग आज बड़े बड़े बिजनेस कर रहे हैं जोकि खेताराम जी बापसी के उपदेशों का ही परिणाम है। 

संत खेताराम जी महाराज द्वारा ब्रह्माजी का मंदिर बनाना

इसके बाद खेताराम जी महाराज ने आसोतरा में ब्रह्मा जी का मंदिर बनाने का निर्णय कर लिया, क्योंकि पूरे विश्व में ब्रह्मा जी का मंदिर पुष्कर में ही था सावित्री जी ने श्राप दिया था कि अगर कोई और जगह ब्रह्मा जी का मंदिर बनाएगा तो उस व्यक्ति को प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही उसका भी देवलोक गमन हो जाएगा।

संत खेताराम जी महाराज ने विक्रम संवत 2018 वैशाख सुदी पंचमी, 20 मई 1961 को ब्रह्मा जी के मंदिर की नींव रख कर काम को प्रारंभ कर दिया। लेकिन पैसों का अभाव होने के कारण खेताराम जी महाराज अपने  मुकुंद घोड़े पर चढ़कर संपूर्ण राजपुरोहित समाज से दान लेकर ब्रह्मा जी के मंदिर को बनाने का काम जारी रखा। 

Sant KhetaRam Ji Maharaj ने राजपुरोहित समाज के दान से 24 साल के भीतर ब्रह्मा जी का भव्य मंदिर बना कर तैयार किया, विक्रम संवत 2041 वैशाख सुदी पंचमी 6 मई 1984 रविवार के दिन साधु संतो भक्तों और  36 ही कॉम की मौजूदगी में  ब्रह्माजी और सावित्री की मूर्ति की स्थापना की। 

प्रतिष्ठा होने के बाद  खेताराम जी महाराज ने अपने प्राण ब्रह्मा जी के चरणों में अर्पित कर दिए और 24 घंटे के लिए अपने भौतिक शरीर में रहने के लिए इजाजत मांग ली।

इसके बाद खेताराम जी महाराज ने अपने हाथों से साधु-संतों को दक्षिणा लेकर संतों को विदा किया।

 इसके बाद दूसरे दिन खेताराम जी महाराज ने अपने समाज के लोगों को बुलाकर उपदेश दिए और  सभी को एकजुट और हिल मिलकर रहने के लिए कहा।

इसके बाद खेताराम जी महाराज ने अपनी झोली और चुटिया तुलसाराम जी महाराज को सौप कर समाज वासियों को हाथ जोड़कर, समाधि की मुद्रा में बैठकर औम का उच्चारण करते हुए,  7 मई  1984 को दोपहर 12:36 पर 72 वर्ष की उम्र मे अमर इतिहास कायम कर ब्रह्म तत्व में विलीन हो गये।

मौके पर मौजूद हजारों लोगों की आंखों से आंसू बह रहे थे परंतु ब्रह्मा जी का अंश आज ब्रह्मा जी में जाकर पुन मिल गया।
खेताराम जी महाराज का बैकुंठ धाम ब्रह्मा जी के मंदिर के सामने बनाया हुआ है। आज भी हजारो लाखो भक्त आसोतरा आते है और बापसी खेताराम जी का आशीर्वाद लेते है।

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संगीता राजपूत Hindi Biography 2021 की लेखिका है। पेश से ये शायरी लेखन का काम करती है।

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