अशोक गहलोत जीवन परिचय – Ashok Gehlot Biography In Hindi

अशोक गहलोत

आज के इस पोस्ट में हम आपको बताने वाले हैं अशोक गहलोत के जीवन परिचय के बारे में, हम इस पोस्ट में आपको Ashok Gehlot Biography, Jivani, Family, Education, Career, CM तक का सफर की शुरूआत के बारे में बताएंगे।

Ashok Gehlot Biography And Wiki

Full Name ( पूरा नाम )Ashok Gehlot
Birth ( जन्म )3 May 1951
BirthPlace ( जन्म स्थान )Jodhpur-Rajasthan
Profession ( व्यवसाय )Politics

        Ashok Gehlot Social Media Accout

Social Media NameUser ID
Instagramashokgehlot.inc
FaceBook@AshokGehlot.Rajasthan
websitehttp://ashokgehlot.in/
YouTubeAshok Gehlot
Twitter@ashokgehlot51

Ashok Gehlot Biography

सामान्य परिवार में जन्म लेने के बावजूद अपने पिताजी के साथ पूरे देश भर में घूम-घूम कर जादू दिखाना तथा अपनी बाइक को बेचकर चुनाव लड़कर राजनीति में आने वाले अशोक गहलोत राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री है।

अशोक गहलोत ने राजस्थान में तीन बार अपनी सरकार बनाई, अशोक गहलोत ने कई विकास के काम करवाएं, जिसमें फ्री दवा वितरण योजना 2008 की चर्चा पूरे देश विदेश में भी हुई। युवाओं के लिए भर्तीया करवाई, इसके साथ ही साथ विकास के नए आयाम स्थापित किए।
अशोक गहलोत ने अपनी सियासी सफर को अपनी पढ़ाई के साथ ही शुरू कर दिया था यह राज्य में तथा केंद्र में कई बड़े-बड़े मंत्री पदों पर भी बने रहे तथा साथ ही साथ राजनीति की जादूगर कहे जाने वाले Ashok Gehlot ने कई चुनाव में जीते तथा अपने विरोधियों को हार का सामना भी करवाया।

Ashok Gehlot Birth, Place, Family

अशोक गहलोत का जन्म राजस्थान के जोधपुर शहर में 3 मई 1951 को हुआ। इनके पिता जी का नाम लक्ष्मण सिंह गहलोत था जो कि एक बहुत बड़े जादूगर हुआ करते थे जो भारत में घूम घूम कर जादू दिखाने का काम करते थे Ashok Gehlot भी उनके साथ ही जाते थे और कई बड़े-बड़े मंचों पर जादू दिखाने का काम करते थे।अशोक गहलोत का विवाह 27 नवंबर 1977 को सुनीता गहलोत के साथ हुआ। Ashok Gehlot के पुत्र का नाम वैभव गहलोत है तथा Ashok Gehlot की पुत्री का नाम सोनिया गहलोत है।

Father ( पिता )लक्ष्मण सिंह गहलोत
Mother ( माता )सेवा देवी
Wife ( पत्नी ) सुनीता गहलोत
Son ( बेटा ) वैभव गहलोत
Daughter ( बेटी ) सोनिया गहलोत

Ashok Gehlot Education, Qualification

अशोक गहलोत अपनी शिक्षा जोधपुर शहर से ही पूरी की, उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा जोधपुर स्कूल से पूरी की, उसके बाद इन्होंने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई शुरू की। पढ़ाई में Ashok Gehlot ठीक-ठाक थे। विज्ञान और कानून में स्‍नातक डिग्री प्राप्‍त की तथा अर्थशास्‍त्र विषय लेकर स्‍नातकोत्‍तर डिग्री प्राप्‍त की।

College ( कॉलेज ) जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय
Degree ( डिग्री ) स्‍नातकोत्‍तर

Ashok Gehlot Career Journey

अशोक गहलोत का जन्म जोधपुर जिले में एक सामान्य परिवार में हुआ इनके पिता जी लक्ष्मण सिंह दक्ष एक प्रसिद्ध जादूगर थे जो पूरे भारत में घूम-घूम कर जादू दिखाने का काम करते थे तो अशोक गहलोत भी इनके साथ पूरे भारत में घूमा करते थे और मंच पर जादू दिखाने का काम करते थे जिस कारण Ashok Gehlot काफी ज्यादा जानकारी हासिल कर ली थी।

पढ़ाई में अशोक गहलोत ठीक-ठाक होते थे 12वी के बाद इन्होंने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय से दाखिला लिया और अपनी पढ़ाई को प्रारंभ किया, पढ़ाई के समय ही अशोक गहलोत गांधीजी के विचार धारा के संपर्क में आए तो इन्होंने कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया, लेकिन सिर्फ सेवा भाव से ना कि राजनीति के तौर पर।

1971 के युद्ध के दौरान लाखों शरणार्थी भारत आ रहे थे, मशहूर डॉक्टर सुब्बाराव कई शहरों में सेवा के काम में लगे हुए थे अशोक गहलोत भी वहां पर पहुंच गए, एक बार अशोक गहलोत काम में जुटे हुए थे तभी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का दौरा हुआ और उन्होंने Ashok Gehlot का देखा,  इंदिरा गांधी को अशोक गहलोत काफी मेहनती लगे तो उन्होंने कहा कि आप कांग्रेस ज्वाइन कर लो, लेकिन अभी चुनाव लड़ने के लिए 5 साल का वक्त पड़ा था क्योंकि अशोक गहलोत की उम्र 20 वर्ष की थी।

इसके बाद अशोक गहलोत वर्धा चले गए और वहां पर गांधी आश्रम में रहे, जब अशोक गहलोत वापस आये तब पूरी तरह गांधीवादी हो चुके थे इन्होंने गांधीजी के सारे नियमों का पालन करना शुरू कर दिया, सूरज डूबने से पहले खाना खाना, गांधीजी के जैसे कपड़े पहनना शुरू कर दिया था।

1972 में Ashok Gehlot ने बीएससी की पढ़ाई की थी रोजगार नही मिला तो घर वालों ने जोधपुर से 50 किलोमीटर दूर पीपाड़ शहर में खाद और बीज की दुकान खुलवा दी, लेकिन धंधा नहीं चला तो घर वापस लौट आए।

आगे की पढ़ाई के लिए इन्होंने अर्थशास्त्र में दाखिला लिया और कांग्रेस के छात्र संगठन से भी जुड़ गए। पहली बार इन्होंने कॉलेज से चुनाव भी लड़ा,  सचिव के पद पर, लेकिन यह हार गए। तब अशोक को NSUI का राज्य अध्यक्ष बना दिया गया।

इसके बाद अशोक गहलोत की संजय गांधी से दोस्ती हो गई, क्योंकि अशोक गहलोत ने उनके लिए काफी ज्यादा मेहनत की थी प्रचार करने के लिए।

देश में आपातकाल खत्म हो चुका था लोकसभा चुनाव कांग्रेस हार चुकी थी तो उसके बाद राज्य के विधानसभा चुनाव के लिए अशोक गहलोत ने संजय से जोधपुर के सरदारपुरा का टिकट ले लिया। इस समय अशोक की उम्र मात्र 26 साल की थी पूंजी के नाम पर इनके पास सिर्फ एक मोटरसाइकिल थी तो इन्होंने उस मोटरसाइकिल को मात्र ₹4000 में बेच दिया और चुनाव लड़ा।  इनके सामने जनता पार्टी के माधव सिंह चुनाव लड़ रहे थे इस चुनाव में जनता पार्टी के माधव सिंह से 4329 वोटों के अंतर से Ashok Gehlot चुनाव हार गये।

इसके बाद जनता पार्टी की सरकार 3 साल के बाद गिर गए तो सन 1980 में संजय गांधी ने अशोक गहलोत को जोधपुर से लोकसभा चुनाव के लिए टिकट दिया। अशोक गहलोत ने अपने दोस्त रघुवीर सैन की सलून की दुकान में अपने पार्टी का कार्यलय खोला और आज भी यही पर अशोक गहलोत आढा है खुद की बाइक नही होने के कारण गहलोत ने अपने दोस्त रघुवीर की बाइक को लेकर  प्रसार किया, पोस्टर छपवाए और जब नतीजे आए अशोक गहलोत ने जनता पार्टी की बलवीर सिंह को 52,519 वोटों की भारी अंतर से हराया था इस चुनाव के बाद अशोक गहलोत दिल्ली पहुंच गए थे और इंदिरा गांधी के साथ अच्छी पहचान बन गई।

अशोक गहलोत इंदिरा गांधी के साथ काफी अच्छी बनने लगी थी तब सितंबर 1982 में मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, केंद्रीय मंत्रिमंडल में नागरिक उड्डयन मंत्रालय का उप मंत्री Ashok Gehlot को बना दिया गया।

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सत्ता राजीव गांधी के हाथ आ गयी थी तब भी अशोक गहलोत राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में भी रहे।

1985 में राजीव गांधी ने अशोक गहलोत को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर राजस्थान भेजा गया।

अंत में 1998 में अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री बने, और 5 साल अपनी सरकार को चलाएं, लेकिन 2003 में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने बुरी तरीके से हराया, तब सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत को दिल्ली बुला लिया, अशोक गहलोत को पार्टी का महासचिव बना दिया गया।

जब अशोक गहलोत दिल्ली आ गए तब सोनिया गांधी ने सीपी जोशी को राजस्थान का नया अध्यक्ष बनाकर राजस्थान भेजा।  5 साल जमकर मेहनत करने के बाद जब 2008 में चुनाव आये तो सबसे ज्यादा टिकट सीपी जोशी के लोगों को ही मिले।

तब अशोक गहलोत को लगा कि मुख्यमंत्री बनना आसान नहीं है लेकिन उदयपुर नाथद्वारा सीट से सीपी जोशी विधायकी का चुनाव मात्र 1 वोट से हार गये।

इधर कांग्रेस पार्टी भी 200 सीटें जीतने का ख्वाब देखने वाली मात्र 96 सीटों पर ही आकर अटक गई, तब बसपा से 6 विधायक जीतकर अशोक गहलोत के पास आ गये, अशोक गहलोत उन विधायकों को कांग्रेस में मिला लिया और अपनी सरकार को बना लिया। सीपी जोशी को यूपीए सरकार में मंत्री बना कर पद दे दिया गया।

इस समय अशोक गहलोत ने पूरे राज्य में फ्री दवा वितरण योजना को लागू किया, कई बड़ी-बड़ी भर्तियां की, जिनकी चर्चा देश-विदेश में हुई। लेकिन उसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में मोदी की आंधी के आगे अशोक गहलोत अपना चुनाव हार गए, राजस्थान में कांग्रेस की सबसे बुरी हार हुई थी क्योंकि 200 में से मात्र 21 सीटी कांग्रेस जीत पाई थी।

इसके बाद अशोक गहलोत फिर दिल्ली चले गए, अब सचिन पायलट को राज्य का नया संगठन मुखिया बनाकर भेजा गया।

इस बार कांग्रेस को 99 सीटों पर जीत हासिल हुई और एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर अशोक गहलोत ने बाजी मार ली।

राजस्थान में कांग्रेस की जीत का कारण यही था की राज्य की जनता वसुंधरा राजे को नहीं चाहती थी क्योंकि वसुंधरा राजे ने 4 सालों में कोई खास जनता और नेताओं के साथ बात नहीं की थी।

चुनाव से ठीक पहले राजस्थान में एक नारा बहुत तेजी से फैला हुआ था जिसका नाम था PM से वैर नही, वसुंधरा तेरी खेर नहीं!

और हुआ भी यही राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार चुनाव हार गई।

Ashok Gehlot Achievement/ Net worth

Monthly IncomeN/A
Totel Net Worth1.7 करोड़ (इंटरनेट से मिली जानकारी के अनुसार)

अशोक गहलोत मुख्यमंत्री कब-कब बने

  • अशोक गहलोत 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे।
  • अशोक गहलोत दूसरी बार 2008 में मुख्यमंत्री बने थे।
  • अशोक गहलोत तीसरी बार 2018 मे मुख्यमंत्री बने।

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अशोक गहलोत whatsapp नंबर- नही पता

अशोक गहलोत के फोन नंबर

अशोक गहलोत की जाती – माली

अशोक गहलोत का परिवार – जोधपुर

अशोक गहलोत का बेटा – वैभव गहलोत

अशोक गहलोत की बेटी – सोनिया गहलोत

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